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जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) के एक सर्वे में बनेड़ा क्षेत्र के मानपुरा में लेड, जिंक, सिल्वर समेत अन्य मिनरल होने की िरपोर्ट आई है। यह रिपोर्ट खान एवं भू-विज्ञान िवभाग के पास आने के बाद बनेड़ा में 5.1865 स्कवायर किलोमीटर में बेसमेटल का एक ब्लॉक नीलाम किया है। यह ब्लॉक एसएमओ फेरो अलोइज प्राइवेट लिमिटेड को दिया है। यह कंपनी अब इस एरिया में अगले दो साल तक एक्सप्लोरेशन (अन्वेषण)का काम करेगी।

इसमें यह देखा जाएगा की इस एरिया में कौनसा-कौनसा मिनरल है और उसकी कितनी मात्रा है। इस कंपनी को एक्सप्लोरेशन के लिए कंपोजिट लाइसेंस दिया है। विभाग के अनुसार, िपछले चार-पांच सालों में प्रदेश में मेजर मिनरल के खनिज ब्लॉक्स की नीलामी बढ़ी है। इसी कारण लाइम स्टोन, कॉपर गोल्ड, प्रदेश में कहीं भी खनिज की संभावना होने पर सरकार पहले राजस्थान राज्य खनिज अन्वेषण ट्रस्ट से विस्तृत खोज कराती थी। इसमें जियोलॉजी डिपार्टमेंट यह काम करता था।

इसमें खर्च अधिक लगने व सरकार के पास इतने संसाधन नहीं होने के कारण अब यह काम निजी कंपनियों को देना शुरू कर दिया है। इसमें मिनरल गहराई पर होने के कारण इसकी मात्रा एवं उपलब्धता की संपूर्ण जानकारी के लिए यह कंपनियां इन ब्लॉक को अपने नाम करा लेती है। अब अगले दो साल तक इस एरिया में एक्सप्लोरेशन का काम होगा। इसके बाद िवभाग इस एरिया की लीज देगा।

इसमें पहली प्राथमिकता इसी कंपनी को मिलेगी जो एक्सप्लारेशन कर मिनरल का पता लगाएगी। आगूंचा में लेड, जिंक, सिल्वर, धूलखेड़ा-जीपिया में आयरन ओर, करेड़ा में ग्रेनाइट, जहाजपुर में मार्बल, बिजौलियां में सेंड स्टोन, सहाड़ा-मांडल में क्वार्ट्ज-फेल्सपार, अभ्रक, कोटड़ी में गारनेट, चूना पत्थर, घेवरिया में सोप स्टोन, बदनौर में स्लेट स्टोन आदि मिनरल है। इसी वजह से सालाना 1500 करोड़ का राजस्व यहां से सरकार में जमा होता है। भीलवाड़ा के बनेड़ा क्षेत्र में जीएसआर्ई ने एक सर्वे किया।

उसमें संकेत मिले थे की मानपुरा में बेसमेटल के भंडार है। इसके बाद यह िरपोर्ट सरकार को दी। अब यह कंपनी मिनरल के लिए अन्वेषण करेगी। यदि उतने एरिया में मिनरल नहीं हुआ तो उस एरिया को वापस सरेंडर भी किया जा सकेगा। यदि उसमें मिनरल होगा तो वही कंपनी लीज लेने की प्रथम हकदार होगी। मानपुरा में अब यह निजी कंपनी एक्सप्लोरेशन का काम करेगी। यदि इस दौरान जो खनन होगा उसमें कुछ मिनरल िनकलेगा तो उसे बाहर ले जाने का अधिकार नहीं होगा। जो भी मिनरल िनकलेगा उसे वहां स्टॉक कर िवभाग को िरपोर्ट देनी होगी। दो साल के बाद उसकी पूरी जांच होगी। इसके बाद आगे लीज की कार्रवाई की जाएगी। इसमें जो माल िनकलेगा केमिकल स्टडी के लिए ही बाहर ले जाया जा सकेगा।

आयरन ओर के बाद अब बेस मेटल के मिनरल ब्लॉक ऑनलाइन नीलाम करने में सफलता मिली है। इसके तहत राजसमंद के खाखलिया खेड़ा, उदयपुर के पिपलिया और भीलवाड़ा के बनेड़ा के बेस मेटल ब्लॉक की नीलामी हो गई। इसमें इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस की जो बेसमेटल की बेसप्राइस है उसकी 3.81 प्रतिशत राशि सरकार में जमा होगी। इसके अलावा निर्धारित रॉयल्टी जमा होगी। एक तरह से माइनिंग चालू होने के बाद उसमें भी सरकार का 3.81 प्रतिशत अलग से शेयर मिलता रहेगा।

Saiyyed Akhtar Ali' Group is glad to announce that on 12th September 2023 we have signed an MOU with the Saudia government for an investment and the upcoming mining project in Rajasthan and technology transfer.

In a significant development for the Indian and Saudi Arabian business landscape, a momentous B2B Memorandum of Understanding (MOU) was inked on September 11, 2023, in New Delhi. The MOU was forged between Saudi Indian Venture Studio (SIVS) and SMO Ferro Alloys Private Limited, focusing on the thriving sectors of Mining, Minerals & Metals, and Waste Management.

At the heart of this historic agreement is Mr. Saiyyed Owais Ali and Mr. Saiyyed Murtuza Ali, the Director of SMO Ferro Alloys Private Limited, who officially signed the MOU on behalf of his company. The MOU outlines a promising partnership wherein the Saudi Arabian firm will extend opportunities to SMO Ferro Alloys Private Limited, allowing them to collaborate in the domains of mining, minerals, metals, and waste management. In addition to access to technology and investment, SMO Ferro Alloys Private Limited has committed to offering support in various fields to Saudi Arabia.

This MOU not only signifies a significant step forward for SMO Ferro Alloys Private Limited but also propels the SMO Ferro Alloys Group to new heights, enabling them to expand their business operations into other countries. This partnership holds great promise for both nations and underscores the potential for collaborative ventures in the ever-evolving world of mining, minerals, metals, and waste management.

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